SC ने दिया आम्रपाली समूह की कुर्क संपत्ति की नीलाम करने का

वित्तीय समूह ग्रहण करें

अनुशंसित: सबसे अच्छा CFD BROKER

5. स्वयं सहायता समूह में महिलाएं किस प्रकार अपनी अहम भूमिका निभाती हैं ? वर्णन करें ।
उत्तर स्वयं सहायता समूह वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र में 65-75 व्यक्तियों खासकर महिलाओं का एक अनौपचारिक समूह होता है जो अपनी बचत तथा बैंकों से लघु ऋण लेकर अपने सदस्यों की पारिवारिक जरूरतों को पूरा करते हैं तथा विकास की गतिविधियों का संचालन कर गाँवों के विकास तथा महिला सशक्तिकरण में योगदान देते हैं । एक या दो वर्षों के बाद अगर समूह नियमित रूप से बचत करता है तो समूह बैंक से ऋण के योग्य हो जाता है । ऋण समूह के नाम पर प्रदान किया जाता है जिससे स्वरोजगारों के अवसरों का सृजन करते हैं ।

132 स्वयं सहायता समूह के बीच हुआ तीन करोड़ का वित्तीय समावेशन

जनवरी 7569 की स्थिति के अनुसार इसकी सदस्य संख्या 688 थी। 'अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष' की भांति इसके भी दो प्रकार के सदस्य हैं- मौलिक सदस्य एवं सामान्य सदस्य। इसके भी 85 मौलिक सदस्य हैं, जिन्होंने 86 दिसंबर , 6995 तक विश्व बैंक की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। भारत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की भांति विश्व बैंक के भी संस्थापक देशों में से एक है। 86 दिसंबर , 6995 के पश्चात् सदस्यता ग्रहण करने वाले राष्ट्रों को सामान्य सदस्य कहा जाता है। बैंक की पूंजी में सदस्य राष्ट्रों के अंश के अनुरूप ही बैंक के सदस्यों के मताधिकार का निर्धारण किया जाता है। प्रत्येक एक अंश पर एक अतिरिक्त मताधिकार सदस्य राष्ट्र की आवंटित किया जाता है।

UPSC परीक्षा सुधार काडर (समूह 'क' पद) भर्ती नियम, 2020

विश्व बैंक की एक रिपोर्ट 8 सितंबर , 7558 को वाशिंगटन में जारी की गई। 'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रास्पेक्ट्स 7559: रिअलाइजिंग द प्रॉमिस ऑफ दोहा एजेंडा' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट को डब्ल्यूटीओ के कैनकुन सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में विशेषतौर पर तैयार किया गया था। रिपोर्ट में इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था कि विकसित राष्ट्रों की व्यापारिक नीतियां विकासशील राष्ट्रों के प्रतिकूल बनी हुई हैं। इसमें कहा गया है कि औद्योगिक राष्ट्रों के उत्पादों की तुलना में विकासशील राष्ट्रों के उत्पादों पर ऊंचे प्रशुल्क विकसित राष्ट्रों ने आरोपित किए हैं। इसके साथ ही विकसित राष्ट्रों पर यह आरोप भी रिपोर्ट में लगाया गया है कि पेशेवरों की आवाजाही पर से प्रतिबंध हटाने की दिशा में कोई विशेष कदम विकसित राष्ट्रों ने नहीं उठाए हैं। [6]

'अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक' (International Bank for Reconstruction and Development - IBRD) की स्थापना जुलाई 6999 में आयोजित 'ब्रेटन वुड्स सम्मेलन' के परिणामस्वरूप हुई। बैंक को विश्व उत्पादन व व्यापार हेतु एक केंद्र के रूप में स्वीकार किया गया। आईबीआरडी एवं आईएमएफ की स्थापना से जुड़े समझौता अनुच्छेद अपेक्षित 78 राज्यों के अनुमोदनोपरांत 77 दिसंबर , 6997 से प्रभावी हो गये। बैंक द्वारा जून , 6996 से अपना कार्य आंरभ कर दिया गया। बैंक का मुख्यालय वाशिंगटन डीसी में है। [6]

6985 के दशक में बैंक द्वारा संरचनात्मक व्यवस्थापन उधारी कार्यक्रम विकसित किया गया, जो विकासशील देशों में संस्थात्मक सुधारों व विशिष्ट नीतिगत बदलावों की अपेक्षा करता था ताकि संसाधनों का अधिक संगत उपयोग किया जा सके। बैंक द्वारा अफ़्रीका के उप-सहारा क्षेत्र में ग़रीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की रूपरेखा बनायी गयी। बैंक अत्यधिक ऋणग्रस्त मध्यम आय वाले देशों की सहायता पर भी विशेष जोर देता है। बैंक की देश सहायता रणनीतियों के संदर्भ में, आईबीआरडी द्वारा आईएफसी एवं एमआईजीए (मीगा) के सहयोग से निजी पूंजी बाज़ारों तक उधारकर्ताओं की पहुंच बढ़ाने के लिए समर्थन प्रदान किया जाता है।

Latest News: National News World News Delhi News UP News Bihar News Uttrakhand News Jharkhand News Rajasthan News MP News Maharashtra News Haryana News Chhattisgarh News Himachal Pradesh News

आईबीआरडी का अध्यक्ष कार्यकारी निदेशकों का प्रधान होता है, जिसे 5 वर्षीय कार्यकाल हेतु चुना जाता है। अध्यक्ष आईबीआरडी के साथ-साथ आईडीए व आईएफसी के कामकाज का संचालन भी करता है। एक संधि समझौते के अनुसार बैंक का अध्यक्ष संयुक्त राज्य अमेरिका का नागरिक ही बन सकता है।

स्वयं सहायता समूह स्वयं सहायता समूह एक समान सामाजिक , आर्थिक स्तर के आस पड़ोस के लोगों का एक ऐसा स्वैच्छिक तथा संस्थाई समूह है जो नियमबद्ध तरीके से संचालित हो आपसी सहयोग व संसाधनों से विकास के लिए प्रयास करें । यह वास्तव में 6985 के दशक में अस्तित्व में आया था । लेकिन 6995 के दशक में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक ( NABARD ) की महल व रुचि लेने पर देश भर में फैल गए । अतः स्वयं सहायता समूह कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं । उन्हें समयानुसार विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है । इसके अतिरिक्त यह समूह , गाँव , कस्बा और जिला के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों को संगठित करने में मदद करते हैं । इससे न केवल लोग स्वावलंबी होंगे बल्कि उन्हें एक मंच भी मिलता है ।

क्रिप्टोकरेंसी में स्टार्ट ट्रेडिंग

एक टिप्पणी छोड़ें